भारत में इस्लामी वित्त समाधान वे ठोस उत्पाद हैं जिनसे कोई व्यक्ति या छोटा कारोबार ब्याज से बच सकता है, मुख्य रूप से शरिया के आधार पर जाँचे गए इक्विटी फंड और सूचकांक, वित्तीय कंपनियों से लीज़ या साझेदारी आधारित वित्तपोषण और सहकारी संस्थाओं के ब्याज-मुक्त ऋण।
भारत में हलाल पेशकश की तलाश कहाँ से शुरू करें?
सबसे पहले किसी भारतीय बैंक में इस्लामी चालू खाता या गृह ऋण ढूँढना छोड़ दें, क्योंकि कोई भी ढाँचा इसकी अनुमति नहीं देता। असली विकल्प शेयर बाज़ार में, कुछ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के पास और स्थानीय सहकारी संस्थाओं में मिलते हैं।
सबसे पुराना शरिया-जाँचा इक्विटी फंड
1996 में शुरू हुए टाटा एथिकल फंड को भारत का पहला शरिया-अनुरूप म्यूचुअल फंड बताया जाता है। यह पारंपरिक बैंकों, शराब, तंबाकू और जुए से जुड़ी कंपनियों को बाहर रखता है और अपने प्रदर्शन की तुलना निफ़्टी 500 शरिया सूचकांक से करता है।
निफ़्टी50 शरिया पर आधारित ईटीएफ
2009 से नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध एक इंडेक्स फंड निफ़्टी50 शरिया की नकल करता है, जो पचास बड़े शेयरों में से केवल अनुरूप माने गए शेयर रखता है और हर महीने जाँच होती है। इसे किसी ब्रोकर के ज़रिये शेयर की तरह एक-एक इकाई में खरीदा जा सकता है।
जाँचा गया ईटीएफ ज़रूरी नहीं कि प्रमाणित हो
फंड प्रबंधक के दस्तावेज़ स्पष्ट करते हैं कि फंड स्वयं शरिया-प्रमाणित नहीं है, वह केवल सूचकांक प्रदाता द्वारा जाँचे गए शेयरों का अनुसरण करता है। इसलिए निवेशक को नकदी के प्रबंधन, शुल्क और गैर-अनुरूप आय के शुद्धिकरण की जाँच खुद करनी चाहिए।
सूचीबद्ध शेयरों की जाँच कैसे होती है
जाँच पहले निषिद्ध कारोबार वाली कंपनियों को हटाती है, फिर वित्तीय अनुपात देखती है: संपत्ति या बाज़ार मूल्य के मुकाबले कर्ज़, ब्याज से होने वाली आय का हिस्सा और प्राप्य राशियाँ। सीमाएँ शरिया सलाहकार के अनुसार बदलती हैं, इसलिए अलग-अलग सूचकांकों की सूचियाँ भी अलग होती हैं।
लाभांश का शुद्धिकरण, अक्सर भुलाया गया कदम
स्वीकृत कंपनी भी ब्याज से थोड़ी आय कमा सकती है। सामान्य तरीका यह है कि मिले लाभांश में से उस हिस्से की गणना करके उसे दान कर दिया जाए। कुछ फंड यह प्रतिशत प्रकाशित करते हैं, वरना निवेशक वार्षिक खातों से इसका अनुमान लगाता है।
वित्तीय कंपनी से लीज़ पर उपकरण का वित्तपोषण
कोई गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी कोई संपत्ति खरीदकर ग्राहक को किराये पर दे सकती है, लगभग इजारा की तरह, या किसी परियोजना की पूँजी में हिस्सेदारी ले सकती है। केरल में आरबीआई ने 2013 में ऐसी संरचना को इस शर्त पर अनुमति दी कि वह जमा नहीं लेगी।
ब्याज वाले ऋण के बिना घर खरीदना
बैंक उत्पाद के अभाव में कुछ खरीदार किसी सहकारी संस्था या वित्तीय कंपनी की घटती साझेदारी का सहारा लेते हैं: संस्था घर का एक हिस्सा अपने पास रखती है, किराया लेती है और धीरे-धीरे अपना हिस्सा बेचती है। राशियाँ छोटी रहती हैं और कानूनी सुरक्षा की बारीकी से जाँच ज़रूरी है।
ऋण सहकारी समितियाँ और ब्याज-मुक्त कर्ज़
कुछ सहकारी समितियाँ अपने सदस्यों को बिना ब्याज कर्ज़ देती हैं, बदले में तय प्रक्रिया शुल्क लेती हैं या छोटे व्यापार के मुनाफ़े में हिस्सा बाँटती हैं। सदस्य बनने से पहले समिति का पंजीकरण, उसके लेखापरीक्षित खाते और किसी नामित शरिया सलाहकार की मौजूदगी जाँच लें।
तकाफुल बीमा अब भी पहुँच से बाहर क्यों है
भारतीय बीमा कानून में तकाफुल के लिए कोई अलग व्यवस्था नहीं है। जो लोग सहयोग पर आधारित सुरक्षा चाहते हैं, वे बिना नियामक सुरक्षा वाली अनौपचारिक सामुदायिक निधियों का सहारा लेते हैं, या अपने धार्मिक मार्गदर्शक से सलाह लेकर पारंपरिक बीमा लेते हैं।
बचत सौंपने से पहले चेतावनी के संकेत
ऐसी संस्था से सावधान रहें जो खुद को हलाल बताते हुए तय और गारंटीशुदा प्रतिफल का वादा करे, बिना पंजीकरण जमा ले या अपने शरिया सलाहकार का नाम न बता सके। तय और गारंटीशुदा प्रतिफल जोखिम साझेदारी के सिद्धांत के विपरीत है और अक्सर किसी संदिग्ध योजना का संकेत होता है।
हर प्रदाता से पूछे जाने वाले सवाल
पूछें कि कौन सा अनुबंध इस्तेमाल होता है, शरिया राय किसने और किन दस्तावेज़ों के आधार पर दी, देर से भुगतान को कैसे संभाला जाता है और कौन सा नियामक संस्था की निगरानी करता है। अनुरूपता प्रदाता के शरिया बोर्ड का आकलन है, किसी वित्तीय परिणाम की गारंटी नहीं।
विशेष बाहरी स्रोत
भारतीय रिज़र्व बैंक की वेबसाइट बताती है कि कौन सी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ पंजीकृत हैं और जमा लेने पर कौन से नियम लागू हैं, जो किसी प्रदाता की जाँच में काम आता है।
