मलेशिया में इस्लामी वित्त उन इस्लामी बैंकों, तकाफुल ऑपरेटरों और इस्लामी पूंजी बाज़ारों का समूह है जो एक विशेष कानून के अधीन हैं, जिनकी निगरानी बैंक नेगारा मलेशिया करता है और जो केंद्रीय बैंक से जुड़ी राष्ट्रीय शरिया परिषद के बाध्यकारी निर्णयों से बंधे हैं।
वर्ष 2000 से पहले के चार बुनियादी पड़ाव
1963 में मक्का जाने वाले हज यात्रियों के लिए एक बचत कोष बना, और 1983 के इस्लामी बैंकिंग कानून ने बैंक इस्लाम मलेशिया की स्थापना संभव की। इसके बाद 1984 में तकाफुल कानून आया और 1994 में तरलता प्रबंधन के लिए एक इस्लामी अंतरबैंक बाज़ार शुरू हुआ।
इस्लामी खिड़कियों से अलग सहायक कंपनियों तक
1990 के दशक में पारंपरिक बैंकों को विशेष खिड़कियों के ज़रिए इस्लामी उत्पाद देने की अनुमति मिली। बाद में कई समूहों ने यह कारोबार एक अलग इस्लामी सहायक कंपनी में स्थानांतरित कर दिया, जिसके अपने खाते, अपनी पूंजी और अपनी शरिया समिति होती है।
बिखरी राय के बजाय एक ही शरिया प्राधिकरण
ताकि अलग-अलग बैंक एक जैसे उत्पादों पर परस्पर विरोधी फैसले न दें, केंद्रीय बैंक ने 1990 के दशक के अंत में एक राष्ट्रीय शरिया सलाहकार परिषद गठित की। तब से उसके प्रस्ताव पूरे बैंकिंग और तकाफुल क्षेत्र के लिए साझा संदर्भ का काम करते हैं।
कुआलालंपुर: एक अंतरराष्ट्रीय मानक-निर्धारक का मुख्यालय
इस्लामी वित्तीय सेवा बोर्ड, जो इस्लामी बैंकों, तकाफुल बीमाकर्ताओं और पूंजी बाज़ारों के लिए विवेकपूर्ण मानक तैयार करता है, ने 2000 के दशक की शुरुआत में कुआलालंपुर में अपना मुख्यालय बनाया। यह निकटता मानक-निर्धारक और मलेशियाई नियामक के बीच संवाद को मज़बूत करती है।
2009 का कानून शरिया सलाहकार परिषद को क्या सौंपता है
2009 का केंद्रीय बैंक कानून इस परिषद को इस्लामी वित्तीय कारोबार पर लागू इस्लामी कानून तय करने वाला प्राधिकरण बनाता है। यह बैंक नेगारा मलेशिया को सलाह देती है, संस्थानों का मार्गदर्शन करती है और किसी उत्पाद के बारे में उनके भेजे गए प्रश्नों का उत्तर देती है।
न्यायाधीशों और मध्यस्थों पर बाध्यकारी निर्णय
जब किसी विवाद में शरिया का प्रश्न उठता है, तो अदालत या मध्यस्थ को प्रकाशित निर्णयों पर विचार करना होता है या मामला परिषद को भेजना होता है। उत्तर उन पर और पूछने वाले संस्थान पर बाध्यकारी होता है, जबकि पहले ऐसी राय को केवल ध्यान में रखना पड़ता था।
2013 का इस्लामी वित्तीय सेवा सुधार व्यवहार में
30 जून 2013 से लागू इस्लामी वित्तीय सेवा अधिनियम ने 1983 और 1984 के कानूनों की जगह ली। यह इस्लामी बैंकिंग, तकाफुल, मुद्रा बाज़ार और विदेशी मुद्रा को एक ही ढांचे में लाता है, जिसमें शरिया अनुपालन एक कानूनी दायित्व बन जाता है।
गारंटीशुदा जमा या जोखिम वाला निवेश खाता?
कानून इस्लामी जमा, जिसकी मूल राशि पूरी लौटानी होती है, और मुदारबा, मुशारका या वकाला पर आधारित निवेश खाते में भेद करता है, जिसमें नुकसान हो सकता है। बैंकों को अपने मौजूदा उत्पादों को पुनर्वर्गीकृत करने और ग्राहकों को सूचित करने के लिए दो साल मिले।
अप्रैल 2020 से लागू शरिया शासन नीति
सितंबर 2019 में जारी यह नीति दस्तावेज़ निदेशक मंडल की ज़िम्मेदारियां, शरिया समिति की संरचना और शरिया समीक्षा, लेखा-परीक्षा व जोखिम प्रबंधन के आपसी तालमेल को तय करता है, ताकि अनुपालन हर संस्थान की रणनीति का हिस्सा बने।
आंतरिक समिति या राष्ट्रीय परिषद: कौन क्या तय करता है?
हर इस्लामी संस्थान की अपनी शरिया समिति होती है जो उत्पादों और दस्तावेज़ों को मंज़ूरी देती है। लेकिन यह समिति उसी मुद्दे पर राष्ट्रीय परिषद के निर्णय से हट नहीं सकती: वह उसे लागू करती है और केवल उन प्रश्नों पर स्वतंत्र रूप से निर्णय लेती है जिन पर अभी विचार नहीं हुआ।
शरिया अनुपालन न होने की घटना से निपटना
जब शरिया समीक्षा या लेखा-परीक्षा किसी गैर-अनुपालक लेनदेन का पता लगाती है, तो संस्थान को उसकी सूचना देनी होती है, कारण दूर करना होता है और ज़रूरत पड़ने पर उससे हुई आय दान में देनी होती है। गंभीर उल्लंघनों पर कानून में निर्धारित दंड लग सकते हैं।
मलेशिया में खाता खोलने से पहले पूछे जाने वाले प्रश्न
पूछें कि उत्पाद इस्लामी जमा है या निवेश खाता, वह किस अनुबंध पर आधारित है, लाभ की गणना और बंटवारा कैसे होता है और कौन-से शुल्क लगते हैं। हर पेशकश की अनुरूपता का आकलन संस्थान की शरिया समिति राष्ट्रीय परिषद के निर्णयों के दायरे में करती है।
विशेष बाहरी स्रोत
बैंक नेगारा मलेशिया की वेबसाइट पर इस्लामी वित्तीय संस्थानों पर लागू कानूनों के पाठ, शरिया नीति दस्तावेज़ और शरिया सलाहकार परिषद के निर्णय प्रकाशित होते हैं।
