बांग्लादेश में इस्लामी वित्त बैंकिंग प्रणाली का एक हिस्सा है जो सामान्य बैंकिंग क़ानून और बांग्लादेश बैंक के दिशानिर्देशों से संचालित होता है, और जिसमें इस्लामी बैंक, इस्लामी शाखाएँ और इस्लामी खिड़कियाँ मिलकर देश की लगभग एक चौथाई जमा राशि रखती हैं।
अस्सी के दशक में शुरुआत
देश का पहला इस्लामी बैंक अस्सी के दशक की शुरुआत में स्थानीय निवेशकों और खाड़ी के साझेदारों के सहयोग से बना। फिर अन्य संस्थाएँ आईं और पारंपरिक बैंकों ने विशेष शाखाएँ खोलीं, जिससे देश दक्षिण एशिया के सबसे बड़े इस्लामी बैंकिंग बाज़ारों में शामिल हो गया।
अलग क़ानून नहीं, पर दिशानिर्देश मौजूद
इस्लामी बैंकों के लिए कोई अलग क़ानून नहीं है, वे सामान्य बैंकिंग क़ानून के अधीन हैं। नवंबर 2009 में केंद्रीय बैंक ने लाइसेंस, शरिया समिति, जमा, निवेश के तरीकों, अनिवार्य आरक्षित निधि, वित्तीय विवरण और जमाकर्ताओं को दिए जाने वाले प्रतिफल की गणना पर दिशानिर्देश जारी किए।
इस्लामी बैंकिंग के तीन रूप
दिशानिर्देश तीन रूपों की अनुमति देते हैं: पूरी तरह इस्लामी बैंक, किसी पारंपरिक बैंक की इस्लामी शाखा, या किसी सामान्य शाखा के भीतर इस्लामी खिड़की। किसी पारंपरिक बैंक का पूर्ण रूप से इस्लामी बैंक में बदलना भी इसी ढाँचे में नियंत्रित है।
बैंकिंग बाज़ार में कितना हिस्सा?
प्रेस में उद्धृत केंद्रीय बैंक के आँकड़ों के अनुसार, 2025 के मध्य तक इस्लामी संस्थाओं के पास बैंकिंग क्षेत्र की 24 प्रतिशत से कुछ अधिक जमा और लगभग 29 प्रतिशत वित्तपोषण था, जिसका बड़ा हिस्सा पूर्ण इस्लामी बैंकों में था।
मुदारबा जमा पर प्रतिफल कैसे मिलता है
बचत खाते और सावधि जमा प्रायः मुदारबा मॉडल पर चलते हैं: जमाकर्ता धन देता है, बैंक उसे निवेश करता है और लाभ घोषित अनुपात में बाँटा जाता है। दिशानिर्देश इस प्रतिफल की गणना का ढाँचा तय करते हैं, जो कभी गारंटीशुदा नहीं होता।
अतिरिक्त तरलता की समस्या
इस्लामी बैंक पारंपरिक ट्रेज़री बिल और सरकारी बॉन्ड नहीं ख़रीद सकते, क्योंकि उन पर ब्याज मिलता है। अतिरिक्त धन लगाने या वैधानिक तरलता अनुपात पूरा करने के लिए वे अनुपालक साधनों पर निर्भर हैं, जो लंबे समय तक स्थानीय बाज़ार में दुर्लभ रहे।
पेयजल से जुड़ा पहला सरकारी सुकूक
दिसंबर 2020 के अंत में सरकार ने अपना पहला सुकूक जारी किया, जो देशव्यापी सुरक्षित पेयजल कार्यक्रम के लिए पाँच वर्ष का इजारा था। बांग्लादेश बैंक वित्त मंत्रालय की ओर से माध्यम का काम करता है और किराया हर छह महीने संस्थाओं और व्यक्तियों को दिया जाता है।
धारकों के पास वास्तव में क्या होता है?
इस संरचना में धारकों के पास परियोजना की परिसंपत्तियों और उपयोग अधिकारों पर हक़ होते हैं जो उन्हें किराये पर दिए गए हैं, ब्याज वाला कोई दावा नहीं। प्रमाणपत्र हस्तांतरणीय हैं, इसलिए नकदी की ज़रूरत पड़ने पर इस्लामी बैंक अपनी हिस्सेदारी बेच सकता है।
जारी करने की एक नियमित शृंखला
इस पहले, कई गुना अधिक अभिदान वाले निर्गम के बाद सरकार ने ग्रामीण सड़कों जैसी बुनियादी परियोजनाओं के लिए नई किस्तें जारी कीं और फिर अल्पकालिक सुकूक भी जोड़े। भारी माँग मुख्य रूप से यह दिखाती है कि इस्लामी बैंकों के पास विकल्प कितने कम हैं।
केंद्रीय बैंक के भीतर शरिया बोर्ड
अक्टूबर 2025 में बांग्लादेश बैंक के निदेशक मंडल ने बैंक समाधान अध्यादेश के आधार पर एक शरिया सलाहकार बोर्ड बनाने को मंज़ूरी दी। इसका काम मानक तय करना, नए उत्पादों की जाँच करना और अस्पष्ट शरिया प्रश्नों का निपटारा करना है।
इस्लामी खिड़कियों के लिए तैयार होते नियम
केंद्रीय बैंक इस्लामी बैंकिंग के लिए अलग नियमों पर काम करता रहा है। चर्चा में आए एक विकल्प के तहत पारंपरिक बैंकों को अपना इस्लामी कारोबार शाखाओं या खिड़कियों के बजाय एक सहायक कंपनी में रखना होगा, ताकि धन बेहतर ढंग से अलग रहे।
खाता खोलने से पहले जानकारी कैसे लें
केंद्रीय बैंक द्वारा प्रकाशित लाइसेंसशुदा बैंकों की सूची देखें, पूछें कि जमा पर लाभ की गणना कैसे होती है और शरिया समिति में कौन है। किसी उत्पाद की अनुरूपता की ज़िम्मेदारी इसी समिति की है, किसी विज्ञापनी लेबल की नहीं।
विशेष बाहरी स्रोत
बांग्लादेश बैंक की वेबसाइट पर इस्लामी बैंकिंग दिशानिर्देश, संस्थाओं को भेजे गए परिपत्र और इस्लामी बैंकिंग क्षेत्र के तिमाही आँकड़े प्रकाशित होते हैं।
